31.5.21

Q-008 रुकी रुकी सही

रुकी रुकी सही फिर भी चल रही सांस है,

बुझी बुझी सही फिर भी थोड़ी सी आस है

थमी थमी हैं दिल की धड़कनें "अजनबी"

उसके आने का इन्हें  फिर भी कयास है।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-008


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