मालूम न था मुहब्बतों में भी नफ़रतें पला करती हैं,
बेकसूर होकर भी अक्सर तोहमतें मिला करती हैं,
अक्सर दफ़्न हो जाते हैं लोग ज़लज़लों के बगैर ही,
रिश्ते नातों की इमारतें जब कमज़ोर हुआ करती हैं।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" Q-166
अक्सर दफ़्न हो जाते हैं लोग ज़लज़लों के बगैर ही,
रिश्ते नातों की इमारतें जब कमज़ोर हुआ करती हैं।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" Q-166
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