3.5.24

Q-Q-166 मालूम न था मुहब्बतों में

मालूम न था मुहब्बतों में भी नफ़रतें पला करती हैं,
बेकसूर होकर भी अक्सर तोहमतें मिला करती हैं,
अक्सर दफ़्न हो जाते हैं लोग ज़लज़लों के बगैर ही,
रिश्ते नातों की इमारतें जब कमज़ोर हुआ करती हैं।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" Q-166


No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...