12.4.24

P-245 काश ! बेदिल होकर ही

काश ! बेदिल होकर ही मिलते हम आपसे,,
कमबख्त ये मुहब्बत तो न हुई होती आपसे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-245

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