12.4.24

M-088 दोस्त बनके गुदगुदाती हैं

दोस्त बन कर गुदगुदाती हैं यादें,
होकर दुश्मन हमें सताती हैं यादें,
खत्म हो जाते हैं सब रिश्ते-नाते,
बस अच्छी बुरी रह जाती हैं यादें।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-088

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