दोस्त बन कर गुदगुदाती हैं यादें,
होकर दुश्मन हमें सताती हैं यादें,
खत्म हो जाते हैं सब रिश्ते-नाते,
बस अच्छी बुरी रह जाती हैं यादें।
होकर दुश्मन हमें सताती हैं यादें,
खत्म हो जाते हैं सब रिश्ते-नाते,
बस अच्छी बुरी रह जाती हैं यादें।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-088
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