1.3.24

S-309 दौर-ए- मुफलिसी

दौर-ए-मुफ़लिसी में भी अमीर हैं हम,
जीस्त में हम ऐसे दोस्त एहबाब ले आए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-309

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K-007 सूरज को मैं

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