16.3.24

P-238 ख़ुदको गुनहगार

ख़ुदको गुनेहगार अब मान भी ले "अजनबी",

बेगुनाह साबित होने में तो सदियां लग जाएंगी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-238

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...