13.3.24

P-237 जब मर्ज़ी आए पलकों

जब मर्ज़ी आए पलकों पर बैठा लेते हैं, जब चाहे गिरा देते हैं,
बड़ी आज़ाद-तबियत के हैं लोग, मन माफ़िक उसूल बना लेते हैं। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-237

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