सब कुछ बस यूंही है।
कल था आज नहीं है।
कल था आज नहीं है।
आज है कल न होगा,
कुछ मुस्तक़िल नहीं है।
ख़त्म तो होगी ये भी,
कहानी तो कहानी है।
किसी का आंसू, आंसू,
और का आंसू पानी है।
क्यों संभालें यादें भी,
यहां सब तो बेमानी है।
अजनबी रहना है ठीक,
दोस्त होना नादानी है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" G-020
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