6.11.23

S-288 मैं क्यों भला किसी को

मैं क्यों भला किसी को आइना दिखाऊं,
जब मेरे पास विकल्प है कि मैं उसे भूल जाऊं।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी"  S-288

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...