7.11.23

Q-141 बिछड़ जाने पर

बिछड़ जाने पर नहीं होती उतनी तकलीफ़, 
जितनी नज़रअंदाज़ किए जाने पर होती है।
बयाँ भी नहीं होती ये हक़ीक़त "अजनबी",
यह तो महसूस, ख़ुद चोट खाने पर होती है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-141

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...