टूट गया हूँ पर बिखरा नहीं हूँ,
-वीरेंद्र सिन्हा ,"अजनबी" M-075
तन्हाई में हूँ, पर तन्हा नहीं हूँ,
दर्द-ओ-ग़म सभी हैं मेरे साथ,
बा-वफ़ा हूँ मैं, बदला नहीं हूँ।
दर्द-ओ-ग़म सभी हैं मेरे साथ,
बा-वफ़ा हूँ मैं, बदला नहीं हूँ।
-वीरेंद्र सिन्हा ,"अजनबी" M-075
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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