19.8.23

S-278 तुझे भी मैन देंख

तुझे भी मैंने देख लिया, ऐ चहकती हुई सुबह!
तू भी मेरी शाम से भी ज़्यादा ग़मगीन होती है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-278

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