14.8.23

K-010 आज़ादी के लिए

 
आज़ादी के लिए शहीद सूली चढ़ गए,
भ्रष्टों ! तुम अपने स्वार्थों की बलि ही दे दो।

विदेशी लूटेरों से धरती उन्होंने बचा दी,
तुम देसी लुटेरों से देश को मुक्ति ही दे दो।

विदेशी तानाशाहों ने ले ली बलि सबकी,
तुम ससम्मान जीने की पद्दति ही दे दो।

हमारे सुंदर सपनों की नींव उन्होंने रख दी,
तुम उनके साकार होने की युक्ति ही देदो।

फिरंगियों से आज़ादी हमे उन्होंने दिला दी,
तुम ज़िंदगी की जद्दोजहद से छुट्टी ही दे दो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" K-010

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