भगतसिंह की संतानें हैं, कसम नहीं खाते करके दिखा देते हैं हम।
एक आवाज़ पे, दुश्मन को उसी की ज़मीं में दफ़ना देते हैं हम।
एक आवाज़ पे, दुश्मन को उसी की ज़मीं में दफ़ना देते हैं हम।
दयालु हैं, मानवता के पुजारी हैं, पशुओं को भी प्यार किया हमने,
वहशी दरिंदे गर उठाऐं सर तो, सुदर्शन चक्र भी चला देते हैं हम।
वसुधेव-कुटम्बकम के हम प्रणेता, शांति मार्ग दिखाया है हमने,
आक्रमण, नरसंहार करने वालों को सबक भी सिखा देते हैं हम।
सर्वधर्म सद्भाव हम में है, सबको फलने-फूलने का मौका दिया हमने,
शत्रु अगर पहुंचाए हानि तो विश्व-नक़्शे से उसे मिटा देते हैं हम।
दैनिक झड़प,ओच्छेपन, कायरता में रखा नहीं यकीन हमने,
इतिहास गवाह है,एक बार में नेस्तनाबूद करके बता देते हैं हम।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" K-009
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