28.8.23

G-014 ज़रूरी नहीं

ज़रूरी नहीं चौखटें ही हों,
बिन चोखट के भी मर्यादा रखी जा सकती है।
ज़रूरी नहीं दरवाज़े ही हों,
बिन दरवाज़ों के भी दस्तक दी जा सकती है।
ज़रूरी नहीं आया ही हो कोई,
आने की आहट फिर भी सुनी जा सकती है।
ज़रूरी नहीं बैर ही हो किसी से,
करीब आने को भी लड़ाई की जा सकती है।

- वीरेंद्र सिन्हा " अजनबी" G-014

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