28.8.23

P-219 उसे भी होता है कुछ कुछ

उसे भी होता है कुछ-कुछ, पर उसने अभी तक नहीं माना,
"अजनबी" इसे कहते हैं "आधी हक़ीक़त आधा फसाना" 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-219

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...