15.7.23

S-274 यूँ तो पत्थरों में

यूं तो पत्थरों में भी कुछ पत्थर कीमती पत्थर होते हैं,
पर इंसानों में तो लोग अक्सर पत्थर से भी बत्तर होते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-274

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...