1.6.23

P-210 संघर्ष करना है तो

संघर्ष करना है कठिन,पर प्रसाद मिलता ज़रूर है।
इंसा हो पत्थरदिल,पर कभी न कभी पिंघलता ज़रूर है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-210

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...