8.5.23

S-267 तुम मिले थे तो

तुम मिले थे तो कुछ ज़िन्दगी जी ली मैने,
वरना मेरे ग़म कहाँ मोहलत देते हैं इतनी भी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-267

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...