16.5.23

Q-113 इन्हें आंसू समझने की

इन्हें आंसू समझने की भूल न करो जो आँखों से निकल रहें हैं,
ये तो बरसों पुराने ग़म हैं मेरे, जो अब कहीं जाके निकल रहें हैं।
और कब तक संभालकर रखूँ इनको अपनी बेगुनाह आँखों में, 
जिन्होंने दिए थे ये ग़म, वोभी तो अब ज़िन्दगी से निकल रहें हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-113

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