मेरे नज़दीक से न गुज़रा कर ख़ुशी,
मेरे ज़ख्मो को हवा मिल जाती है।
मेरे अपने भी मुझे पहचान नहीं पाते,
मेरे चेहरे पर जब तू खिल जाती है।
मेरे ज़ख्मो को हवा मिल जाती है।
मेरे अपने भी मुझे पहचान नहीं पाते,
मेरे चेहरे पर जब तू खिल जाती है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-062
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