12.5.23

Q-112 मुझसे छिपी नहीं थीं

मुझसे छिपी नहीं थीं, अपने हाथों की लकीरें,
फिर तेरे लिए मैंने इतने ख्वाब क्यों सजा लिए।
मैं कभी पढ़ न सका तेरे हाथों की रेखाएं भी,
मै क्या करता, इतनी जल्दी तूने हाथ छुड़ा लिए। 

 -वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-112

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