15.5.23

P-206 जो दरवाज़े हम

जो दरवाज़े हम दूसरों पर बंद कर देते हैं,
वो ही हमारे लिए भी तो बन्द हो जाते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-206

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...