14.5.23

P-205 यूंही नहीं मिल जाते

यूंही नहीं मिल जाते इनामो-इकराम, शोहरतो-ख़िताब,
ज़मीर बेच कर के करनी पड़ती हैं ग़द्दारियाँ बेहिसाब।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-205

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