7.4.23

P-204 कभी कभी विवेकहीन इंसाँन

कभी-कभी विवेकहीन इंसाँन बहुत बहुत पछताता है,
पछतावे के बीज उसने कब बो दिए वो समझ नहीं पाता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-204

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