कभी ख़ुशियों में उदासियों की झलक दिखाई देती है,
डबडबाई आँखों में हल्की मुस्कराहट दिखाई देती है,
अजीब नाकाबिले-बयां कैफ़ियत हो जाती है दिल की,
दिल में कभी रौशनी तो कभी तारीकी दिखाई देती है।
डबडबाई आँखों में हल्की मुस्कराहट दिखाई देती है,
अजीब नाकाबिले-बयां कैफ़ियत हो जाती है दिल की,
दिल में कभी रौशनी तो कभी तारीकी दिखाई देती है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-059
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