तू है तो नहीं छोड़ता मैं इस दुनिया को,
वरना तो भला इस दुनियाँ में रक्खा क्या है।
वरना तो भला इस दुनियाँ में रक्खा क्या है।
बस तेरी मुहब्बत ही एक हकीकत है यहाँ,
वरना तो मसनुई दुनियां में रक्खा क्या है।
तेरी मेरी मुहब्बत में ही है कुछ ख़ास बात,
वरना तो इश्क-मुहब्बत में रक्खा क्या है।
तू ही है मेरी असली ख़ुशी इस दुनियां में,
वरना तो दीगर ख़ुशियों में रक्खा क्या है।
तू बना है गर हमसफ़र तो सब हासिल है,
वरना तो पाने को मंज़िल में रक्खा क्या है।
तेरे ही वास्ते किया है मैंने घर को रौशन,
वरना तो वीरानों को सजाने में रक्खा क्या है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"G-010
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