13.3.23

S-240 बदलती दुनिया मे

बदलती दुनियाँ में आशना भी अजनबी नज़र आते हैं।
कल तलक थे दोस्त, आज दुश्मनी पर उतर आते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-240

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...