12.3.23

S-239 नई राहें पकड़ लीं

नई राहें पकड़ लीं, जानते ही नहीं कहाँ जा रहे हैं।
बस ज़िद पर अड़े हैं, जानते ही नहीं क्या गंवा रहे हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-239

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...