2.3.23

S-236 कभीकभी

कभी कभी फ़ैसले भी बड़े अजीब होते हैं,
वोही कर लेते हैं फ़ासले,जो करीब होते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-236

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...