हुस्न वाले ख़ुद ही हैं मुंसिफ,
इश्क़ का कानून बड़ा लचर है।
भला ख़ुद को क्यों देंगे सज़ा,
क़ातिल तो उन्हीं की नज़र है।
इश्क़ का कानून बड़ा लचर है।
भला ख़ुद को क्यों देंगे सज़ा,
क़ातिल तो उन्हीं की नज़र है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-099
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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