15.3.23

P-199 जबसे दोस्त बन गए हैं

जबसे दोस्त बन गए हैं दुश्मन "अजनबी",
दुश्मनों को भी अब याद करना पड़ता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-199

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...