13.3.23

Q-098 ये दुनियाँ सिमट गई

ये दुनियाँ सिमट गई होती बुतों में,

इंसाँ का वास्ता गर इंसाँ से न होता। 

मैंभी क्यूँ करता मुहब्बत किसी से,

हुस्न अगर मुहब्बतों के वास्ते न होता।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-098


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