आपके लिए सारा ज़माना ख़राब था, अब लाजवाब हो गया क्या?
आपका नज़रिया अब अच्छा है, और हमारा अब ख़राब हो गया क्या? P-196
आपका नज़रिया अब अच्छा है, और हमारा अब ख़राब हो गया क्या? P-196
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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