बहुत महंगी होगई है मुस्कुराहट अब,
न दिखती है ज़िन्दगी में न तस्वीर में।
फिरभी उसे ज़िंदा रक्खे हैं हम शायर
अपने ख़्वाबों ख्यालों और तहरीर में।
न दिखती है ज़िन्दगी में न तस्वीर में।
फिरभी उसे ज़िंदा रक्खे हैं हम शायर
अपने ख़्वाबों ख्यालों और तहरीर में।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-052
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