30.3.23

M-056 जीवन नहीं चलता

जीवन नहीं चलता कुंठित होकर,
कुछ हल नहीं होता चिंतित होकर,
आदमी एक सामाजिक प्राणी है,
रह नहीं सकता स्वयं सीमित होकर।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-056

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