7.2.23

S-228 ख़्वाब पूरे होते नहीं,

ख़्वाब पूरे होते नहीं, फिरभी तुझे ख़्वाबों में सजा रक्खा है।
हक़ीक़त जानके भी, दिल को मैंने मुग़ालते में लगा रखा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-228

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