7.2.23

S-226 मुद्दत गुज़री,

मुद्दत गुज़री, नहीं कोई इम्कान उसके आने का,
फिर भी क्यों जुनूँ है मुझे राहों में आंखें बिछाने का। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-226

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