13.2.23

Q-093 रात के बाद,

रात के बाद, सुबहा भी ज़रूरी है।
जीने के लिए वजहा भी ज़रूरी है।
ख़ुशी संग कुछ ग़म भी रहें शामिल,
ज़िंदगी में कोई मसला भी ज़रूरी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-093

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