27.2.23

P-192 रोज़-रोज़ नई तोहमतें

रोज़-रोज़ नई  तोहमतें, नई अदावतें, नई नफ़रतें,
छोटी सी ज़िन्दगी को कितना लंबा समझ रहे हैं लोग।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-192

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