24.12.22

S-214 शायद मसरूफ़

मसरूफ़ होगा वो, मेरे जनाज़े में न हो सका शामिल,
"अजनबी", शायद तेरी मौत उसकी फ़ुर्सत में ना हुई।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-214

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