4.12.22

S-207 ग़ौर से पढ़ मुझे

ग़ौर से पढ़ मुझे, मेरी शायरी में कुछ हक़ीक़त भी छुपी है,
मेरी हर शिकायत में कहीं न कहीं तेरी तारीफ़ भी छुपी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-207

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...