31.12.22

P-183 बस कैलेंडर जैसी

बस, केलेंडर जैसी होके रह गईं हैं ये ज़िन्दगियां हमारी,
बीती जा रहीं हैं पन्ना-पन्ना बदल के ज़िन्दगियां हमारी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-183

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