बस मैं अपनी ग़लतियों को
याद करता हूँ,
ये न समझ लेना मैं तुमको
याद करता हूँ।
याद करता हूँ,
ये न समझ लेना मैं तुमको
याद करता हूँ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-178
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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