11.12.22

P-177 वक़्त भर देगा

वक़्त भर देगा ज़ख़्मों को, लोग ये कैसे बोल देते हैं,
यहां तो मुद्दतों पुराने ज़ख़्म आज ही मिले जैसे लगते हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-177

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