20.10.22

S-177 जब तेरे दिए ज़ख्म

जब तेरे दिए ज़ख्म ही मुझे अज़ीज़ हैं,
तो फिर क्यों न हो मुझे तेरी आरज़ू।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-177

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