8.10.22

S-175 मुझ को मालूम है

मुझ को मालूम है, चंद घंटों का ही सवेरा है,
जीस्त में लौट के आना तो फिर वही अंधेरा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-175

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