15.10.22

P-142 ज़माने की निगाह में

ज़माने की निगाह में गिरने की परवाह ना सही,
पर नज़रे-ख़ुद में तो शर्मिंदगी का डर लाज़िम है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-142

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