16.9.22

S-169 लम्हा-लम्हा तन्हा

लम्हा-लम्हा तन्हा-तन्हा होता जा रहा हूँ मैं,
ये रिश्ते एक ही झटके में टूट क्यों नहीं जाते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-169

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