19.7.22

Q-073 कहीं जज़्बात

कहीं जज़्बात होते ही नहीं,
कहीं दरियाऐ-जज़्बात होते हैं।
कहीं आंसू बहते ही नहीं,
कहीं अश्कों के सैलाब होते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-073

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